माँ

 



माँ इश्वर का वो अंश है जिसकी तुलना संसार में किसी से नहीं किया जा सकता है | माँ कभी जननी है तो कहीं पथदर्शक, 

कभी रक्षक है तो कभी संरक्षक |माँ का हर ऱूप अतुलनीय है | इश्वर ने जब सृष्टि की रचना की तो अपने प्रतिरूप में माँ की रचना की जिससे वो हर पल सब पर प्यार और ममता बराबर बरसाता रहे | 🙏


                 माँ हीं वो कड़ी है जो अपने बच्चों को उचित संस्कार देकर उसे संसार में इस योग्य बनाती है कि वो एक मिशाल बन कर यश प्राप्त कर सके | माँ के प्रयासों से ही 

उसके संतान रीति रिवाजों, सभ्यता और संस्कृतियों का अनुसरण कर एक उन्नत समाज की स्थापना कर सकते हैं |

क्योंकि माँ हीं अपने संतानों की प्राथमिक पाठशाला होती है 

| अपने प्यार और वात्शल्य से वो अपने संतान को दयालुता का पाठ भी सिखलाती है | परंतु कभी कभी अपने सख्त व्यवहार से उन्हें पतन के मार्ग पर जाने से भी बचाती है |🌹🌴🏵


    

किसी भी व्यक्ति का चरित्र निर्माण उसके माँ की बुद्धिमत्ता पर भी निर्भर करता है | लाड़ प्यार के नाम पर संतान को अधिक छूट देने वाली माँ को बाद में पछतावा हीं करना पड़ता है | अतएव प्रत्येक माँ का यह कर्तव्य है कि वह अपने संतान को उचित संस्कार देकर उसे संसार में महान व आदर्श नागरिक बनाए |.🙏


               आज के आधुनिक समाज में प्रत्येक व्यक्ति का जीवन द्व्ंद् और प्रतिस्पर्धा के कारण अत्यंत जटिल हो गया है |इस आधुनिकता में माँ का भी व्यक्तव दोहरा हो गया है |

उन्हें नौकरी, व्यवसाय के साथ साथ घर परिवार का भी देखभाल करना पड़ता है |एेसे में एक माँ का दायित्व और भी कठिन हो जाता है | इसके बावजूद भी वो अपने कर्त्तव्य का पालन भलि भाँति कर अपनी पीढ़ी के नव निर्माण का कार्य करती रहती है | इसी कारण माँ की गरिमा और भी ऊपर हो जाती है |🌹🌴


माँ के प्रेम से बड़ा सुख नहीं है कोई न हीं उसके आशीर्वाद से बड़ी कोई शक्ति | माँ को नमन हर रूप में करना यहीं ह


र संतान का धर्म है |इसी लिए तो नारी का यह रूप जो माँ के ममता से भरा है वह जग में पूजनीय है |🙏🙏

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

रेत की मछली उपन्यास :- समीक्षा

बाणभट्ट की आत्मकथा:- समीक्षा और सारांश

पीली धूप chapter 4