पीली धूप chapter 4
स्मृति के अंश जब एस. पी . साहब ने मंगल को बॉडी की पहचान करने के लिए चलने को कहा तो मंगल भी थोड़ी देर के लिए स्तब्ध रह गया| पर अपने आप को सँभालते हुए नीलिमा को जीप की तरफ इशारा करते हुए कहता है -हमें एस. पी .साहब के साथ चलना होगा कोई आदमी की बॉडी मिली है नाले के दूसरे मुहाने पर ,यहाँ से कुछ दूर पर है |चलो ....और कहते- कहते चुप हो गए.. | उनकी आंखे डबडबा गई| नीलिमा पत्थर सी आगे बढ़ कर जीप में बैठ गई |जीप चलने लगी ...,और नीलिमा भी कुछ पल के लिए बीते हुए वक्त में गुजरने लगी..,जब पहली बार हरीश के साथ जीवन के नए परिवेश में आयी थी | सब कुछ उसके आंखो के सामने से मन के आइने में साफ़ - साफ़ दिखने लगा जैसे यादों की आँधी चलने लगी | नीलिमा बिहार के पूर्णिया जिले के एक छोटे से गाँव सेंगर की रहने वाली ,पढ़ी लिखी ,गोरा रंग, छड़हरी काया और खींची हुई आँखे निश्छल और शांत लड़की थी | जब पहली बार हरीश उसे देखने आया था, तो एक ही ख्वाहिश थी की वो उसे मान -सम्मान के साथ अपने परिवार का अभिन्न हिस्सा माने | हर...