पीली धूप Chapter 3
नीलिमा और मंगल दोनों घबराये हुए पुलिस चौकी पहुँचे |
नीलिमा ने पुलिस कांस्टेबल से पूछा -साहब ! एक रिपोर्ट लिखवानी है |
कांस्टेबल सामने बैठे सब इंस्पेक्टर बिपिन सिन्हा जी की तरफ़ इशारा करते हुए कहा -बड़े साहब वहाँ हैं,
जा कर अपनी रिपोर्ट वहीँ लिखवाओ मुझे अभी पेट्रोलिंग पर जाना है |
नीलिमा सब इंस्पेक्टर के पास जाकर बोलती है -साहब ! मेरा पति कल दुकान के लिए घर से सुबह निकला था लेकिन अभी तक घर वापस नहीं लौटा |हमलोगों ने दुकान पर जाकर भी देखा लेकिन वहाँ कोई नहीं था |दुकान का गेट भी कुछ टूटा और बिखरा लग रहा है ,और बगल वाले जगेसर चाचा ने भी जो कहा वो सुनकर हमें बहुत डर लग रहा है |सब कुछ एक सांस में हीं कह रही थी |
सब इंस्पेक्टर बिपिन सिन्हा ने सामने कुर्सी पर बैठने का इशारा करते हुए एक ग्लास पानी मंगवाया और कहा -मैडम !
पहले आप शांत हो जाइये |फ़िर जो हुआ वो बताइए |हम है ना आपकी समस्या का समाधान निकल आएगा |
बिपिन सिन्हा अभी पिछले महीने ही बिहार से ट्रांसफर होकर पश्चिम बंगाल के शाहपुर जिले में एक पुलिस अधिकारी के रूप में नियुक्त हुए थे | वे एक ईमानदार और न्याय पसंद अधिकारी थे ।
वे मूलतः बिहार के थे पर क्षेत्रवाद से सख्त नफरत करते थे| चालीस साल का हृष्ट पुष्ट ,सावले रंग का लेकिन ईमानदारी की चमक उसके चहरे पर एक अद्भुत आकर्षण पैदा कर रही थी |
नीलिमा उनकी बातें सुनकर थोडा गंभीर होकर बोली -साहब !कल तुफानी रात से इंतजार कर रही हूँ , मैं अकेली अपनी दो साल की बच्ची को पड़ोस में किसी के हवाले छोड़ कर पति की तलाश में निकली हूँ और आप कह रहे हैं शांत हो जाऊं |अपने गाँव से इतने दूर दुसरे प्रदेश में दो जून की रोटी और थोड़ी से सुख चैन की तलाश में आये थे ,लेकिन हमारा तो सब लुटता दिख रहा है |इतना कहते हीं उसका धैर्य जबाब दे रहा था और आँखों से आंसू छलक पड़े |
सब इंस्पेक्टर बिपिन सिन्हा ने बड़े शांत भाव से समझाते हुए कहा -आप बिलकुल चिंता मत कीजिये हम जरुर ढूंढे लेंगे |
आप पूरी घटना हमें बताइए ,और एक रिपोर्ट तैयार की |
नीलिमा थोडा शांत होकर बोली -साहब ! हमारी किताबों की दुकान स्टेशन के सामने वाली गली में है |जो जी .एस कॉलेज शाहपुर के ठीक सामने पड़ता है | जगेसर चाचा की चाय की दुकान भी वहीं चौराहे पर है |उन्होंने ही हमें बताया की कल कॉलेज के कुछ लड़के हरीश को मार रहे थे और बस्ती के पीछे वाली गाँव से लड़कों को बुलाकर मेरे पति को न जाने कहाँ ले गए |अभी तक वो नहीं आये हैं |
सिन्हा जी बड़े ध्यान से उसकी बात सुन रहे थे फ़िर बड़े आश्चर्य से कहा -बस्ती ! कौन सी बस्ती ?
वहीँ ना शिवपुरी बस्ती जो गोलपुर गाँव के सामने है और पिछले साल दंगा हुआ था ?
जी वही ! नीलिमा ने सर हिलाते हुए कहा
मंगल बीच में बोल पड़ता है -पर साहब उस घटना के गुजरे तो एक साल हो गए और फ़िर हम बस्ती वाले तो गाँव से कोई लेना देना नहीं रखते , उसपर अपनी कितनी ही जमीन उस गाँव में छोड़ दिए उसके बाद भी वे हमसे क्यों झगडा कर रहे हैं ?
सिन्हा साहब अब गंभीर हो गए थे क्योंकि ये केवल आपसी रंजिश नहीं थी इसमें दो भिन्न भाषा और क्षेत्र के लोगों के बीच वर्चस्व की लड़ाई थी|उन्होंने बड़े गंभीर होकर पूछा -क्या आपलोगों को किसी खास व्यक्ति पर शक है तो उनका नाम रिपोर्ट में दर्ज करवाइए ताकि हम आगे की पूछताछ जारी कर सकें|
मंगल ने कहा साहब तालाब के बगल वाले घर के संतो मुखर्जी और उसका बड़ा भाई बिठ्थल मुखर्जी पर शक है |
क्यूंकि उन्ही लोगों ने पिछले साल मछली पकड़ने गए मेरे छोटे भाई बिराज से झगड़ा किया था और हम सब बस्ती वालों को बहुत परेशान किया था |साहब लगता है वे ही अपनी पुरानी दुश्मनी निकलने के लिए हरीश के साथ कुछ गलत किये होंगे |
ठीक है अब आप लोग घर चलिए हम गोलपुर गाँव जाकर पता लगाते हैं ,जैसे हीं कुछ पता चलेगा हम खबर कर देंगे |चिंता मत कीजिये हरीश जरुर मिल जायेगा |कह कर बिपिन सिन्हा ने अपनी जीप निकलवाई और गोलपुर गाँव की तरफ़ निकलने के लिए दो कांस्टेबल साथ ले लिए और नीलिमा और मंगल को साथ लेकर उनकी दुकान भी देखने गए |आस पास के लोगो से पूछ ताछ की , पर कुछ खास नहीं पता चला |
उनकी जीप अब शिवपुर बस्ती की तरफ़ निकल चुकी थी पर रास्ते में एक बहुत बड़ा पेड़ टूट कर गिरा हुआ था सो रास्ता जाम था , और अभी घंटा भर लगता उसे हटाने में |जीसो सिन्हा साहब ने नीलिमा को घर जाने का इशारा कर जीप रोक दिया | नीलिमा और मंगल विवश और परेशान थे ,कोई रास्ता नहीं सूझ रहा था वे जीप से उतर कर पैदल चल कर बस्ती की तरफ बढ़ने लगे |
तभी पेड़ के पास भीड़ इकठ्ठा हो रही थी | पास जाकर देखा तो एक बड़ा सा नाला था सब बोल रहे थे पता नहीं किसकी साइकिल है नाले में कैसे पहुँची ?कहीं रात के तूफ़ान और बारिश के पानी में कोई इस खुले गटर में चला तो नहीं गया ?सब परेशान थे कुछ मजदूर पेड़ों की कटाई रोककर नाले के नीचे से साइकिल निकालने लगे |कीचड़ से साइकिल सनी होने के कारण पता नहीं चल रहा था की किस रंग का है पर कुछ लोगों ने पानी मारा तो साइकिल देखकर नीलिमा के पैरों तले ज़मीन खिसक गए |
वो परेशान होते हुए मंगल से बोली -भैया ये तो हरीश की साइकिल है !
क्या ?ये यहाँ कैसे पहुँचा ?पर अगर साइकिल यहाँ है तो हरीश कहाँ है ?
मंगल दौड़ते हुए जीप को पीछे से हाथ देते हुए चिल्लाया -साहेब यहाँ आइये ...यहाँ देखिये ये क्या है ?
सिन्हा साहब ने जीप पीछे लेने को कहा और वहा भीड़ लगे हुए नाले के पास जाकर देखा |नीलिमा बैठी रो रही थी |मंगल ने बताया साहब ये साइकिल हरीश की है ?पर हरीश नहीं मिला ....साहब!
सिन्हा साहब ने अपनी टीम को नाले की सफाई करने वालो को बुलाने को कहा |
अब अंदेशा लगाया जाने लगा की कहीं रात के अँधेरे में गाँव वालों ने इस नाले में तो नहीं फेंक दिया हरीश को ?
या फ़िर हरीश जब उनसे बचने के लिए भाग रहा हो तो उस तुफानी रात में जब सड़क पर पानी लबालब भरा हुआ था नाले दिख नहीं रहे हों और हरीश फिसलकर गिर गया हो ?मन अंदेशों और अनहोनी की आशंकाओं से भर गया था जो भी वहाँ लोग थे सभी हाय हाय कर रहे थे |नीलिमा उतनी ही अन्दर से टूटती जा रही थी और जार बेजार रोये जा रही थी |
मंगल ने नीलिमा को हिम्मत बंधाते हुए कहा -चुप हो जाओ बहुरिया!
हरीश को कुछ नहीं होगा |वो मिल जायेगा |एस पी साहब है ना वो जरुर ढूंढ लेंगे हरी को ...
उसके साथ ऐसा कुछ गलत नहीं होगा वो बड़ा ही नेकदिल और साफ़ दिल का लड़का था |
पानी की बोतल नीलिमा की तरफ़ बढ़ाते हुए कहा - पानी पी लो , तो थोडा मन शांत हो जायेगा तुम पर और भी जिम्मेबारी है तुम ही हिम्मत हार जाओ गी तो इस बेगाने शहर में कैसे जी पाओगी | हिम्मत से काम लो सब ठीक हो जायेगा |
वैसे भी जिंदगी में जब गम आते हैं तो पहाड़ की तरह होते हैं और जब ख़ुशी आती है तो क्षण भर में बीत जाती है |ये दुःख के पल भी बीत जायेंगे |
नीलिमा हिम्मत को बांधती है और मुनिया को याद कर थोडा ताकत जुटाती है और
जाकर एस पी साहब से पूछती है- कुछ मिला साहब !
एस पी साहब ने ना में सर हिलाया |ये सुनकर नीलिमा को थोडा हिम्मत हुआ और एक आशा भी हुए की शायद हरीश ठीक वो ?कही चोट लगी हो या बेहोश हो गया हो इसलिए घर तक नहीं आ पाया |.
अब उसे लग रहा था शायद हरी घर आ गया हो और मै यहाँ ढूंढ रही हूँ एक बार घर चल कर भी देखूं ..|
तभी एक कॉल एस पी साहब को आती है - सर ,नाले का दुसरा किनारा शहर के उस तरफ खुलता है वहाँ किसी की बॉडी मिली है |आप जल्दी आ जाइये |
एस पी साहब को इसी बात का डर था ....(ओ नो ! नॉट अगेन )बोलते हुए मंगल को सारी बात बताई की शहर की दूसरी तरफ इस नाले का निकास है वहाँ एक बॉडी मिली है चल कर पहचान कर लीजिये |शायद .....और बोलते बोलते चुप हो गए |
तो क्या वो बॉडी हरीश का हीं है या कोई और है ..जानने के लिए अगले अंक में जारी है ...
नीलिमा अब क्या करेगी? कैसे इन परिस्थितियों का सामना करेगी ?...
क्रमशः ....बने रहें


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