मुसाफिर... तुझको चलना होगा

 


मुसाफ़िर, .. तुझको चलना होगा.. 🌈



मुसाफ़िर , तुझको चलना होगा, 

पथ में फ़ुल बिछॆ हों ,या फिर काँटों पर भी चलना होगा. 

कंकड़ - पत्थर से टकरा कर, फ़िर से तुम्हें सँभलना होगा., 

मुसाफ़िर , तुझको चलना होगा., 🐚🌹🌴



सुख के घने छाँव हों, या फिर, दुख के धुप में रहना होगा. 

आसमान के नभ के तारों ,के भी पार पहुँचना होगा.., 

मुसाफ़िर , तुझको चलना होगा., 🏵🌹



जीवन में संगीत मधुर हो, या कोई कर्कश वाणी, 

सब कुछ तुझको सहना होगा, आगे बढ़ते रहना होगा.., 

प्यार मिले या अंगारे, जो तुमने हैं फ़ैलाए ,

तुम्हीं को ,अब सब रखना होगा., 

मुसाफ़िर , तुझको चलना होगा,.., 🐦🌴🌹🏵


दिन के ढ़लने से पहले, तुझे मंजिल तक पहुँचना होगा., 

घोर निराशा के चादर से, अब तो बस निकलना होगा ,

जीवन में कुछ ऐसा, करके अब तो तुम्हें दिखाना होगा .,

मुसाफ़िर , तुझको चलना होगा... ✈⏳



जर्जर तन के साये हों , या हो नव यौवन की स्फ़ुर्ति ..,

हर हाल में तुझको चलना होगा, बस आगे बढ़ते रहना होगा..

साथ में कोई हो साथी, या फिर अकेले हो जाना .

 जीवन पथ पर , ये मुसाफ़िर ,

                      बस आगे , बढ़ते ही रहना होगा...

मुसाफिर तुझको चलना होगा... 🙂 🙂🌍🌈🌴🌴🌹🐚




माधुरी सिंह 

🙏🙏


टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

रेत की मछली उपन्यास :- समीक्षा

बाणभट्ट की आत्मकथा:- समीक्षा और सारांश

पीली धूप chapter 4