Learn to write Hindi essay by easy process
निबंध लेखन
निबन्ध साहित्य का एक स्वतंत्र अंग है। हिंदी का निबंध शब्द अंग्रेजी के ESSAY शब्द का अनुवाद है जो फ्रेंच के Essai से बना है जिसका अर्थ है - To attempt अर्थात् प्रयास करना।
आज हम इसी विषय से संबंधित विशेष जानकारी प्राप्त करेंगे जिसमें प्रमुख हैं -..
. निबन्ध क्या है?
. निबन्ध कितने प्रकार के होते हैं?
. निबन्ध लेखन कैसे सीखें?
. निबन्ध की शैली?
निबंध क्या है?
निबंध आत्म अभिव्यक्ति का वह सहज साधन है जहां निबंधकार अपने सहज स्वाभाविक भावों को अपने पाठकों तक पहुंचता है।
फ्रांस के मौंतेन को आधुनिक निबंध का जन्मदाता माना जाता है।
परिभाषा:- निबंध विचारों, उद्धरणों एवं कथाओं का सम्मिश्रण है।
निबंध के प्रकार:-
निबंध मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं -
1 . भावात्मक
2. विचारत्मक
3. वर्णनात्मक
भावात्मक निबंधों में भावों की प्रधानता होती है और विचारात्मक निबंध में विचारों की प्रमुखता होती है।परंतु कोई भी निबंध केवल भाव या केवल विचार के सहारे नहीं लिखा जाता है। वह अपने साथ साथ भाव और विचार दोनों लेकर चलती है लेकिन जिस पक्ष की प्रधानता होती है निबंध उसी श्रेणी में आता है।
जिस विचारात्मक निबंध में विचारों की गंभीरता के साथ साथ भावों की सरसता का समुचित समन्वय न हो तो वह निबंध की श्रेणी में न आकर लेख या प्रबंध की श्रेणी में आता है।
विचारात्मक निबंध में निबंधकार ऐतिहासिक या वैज्ञानिक दृष्टिकोण का उल्लेख करता है और अपने आप को चिंतन के माध्यम से विषय के साथ एकाकार करता है। परंतु जिस विचारात्मक निबंध में विषय ज्ञान का आभाव हो वह निबंध की श्रेणी में नहीं आता।
जबकि भावात्मक निबंधों का मूल आधार आवेग (emotion) है।
. निबन्ध लेखन कैसे सीखें?
निबंध लेखन विचारों एवं भावों के साथ विषय विस्तार का माध्यम है। निबंध लिखने के लिए किसी ख़ास शिल्पविधान को निर्धारित नहीं किया जा सकता है। लेकिन एक सुगठित और आकर्षक निबंध लिखने के लिए तीन मुख्य बातों का ध्यान रखना आवश्यक है -
1. भूमिका/परिचय (विषय निरूपण)
2. व्याख्या और
3. निष्कर्ष।
भूमिका:-
निबंध की शुरुआत विषय परिचय अथवा अपने मत या विचारों के निरूपण से करना चाहिए। हर किसी की विचारधारा और चिंतन क्षमता अलग अलग होती है। निबंध लिखते समय सबसे पहले भूमिका के रूप में विषय का संक्षिप्त परिचय देना चाहिए।
व्याख्या/विश्लेषण:-
विश्लेषण निबंध की आत्मा है इसमें विषय की विस्तृत व्याख्या कर समुचित रूप से प्रकाश डालना चाहिए। उस विषय को कई खंडों में बांटकर प्रत्येक खंड पर क्रमिक प्रकाश डालना चाहिए।
इस अंश में विभिन्न मतों का खण्डन एवं विश्लेषण भी किया जा सकता है।
निष्कर्ष:
निबंध की समाप्ति में ऊपर कही हुई बातों को सारांश में अभिव्यक्त किया जाना चाहिए । निबंध की सरलता और सौम्यता का ध्यान रखते हुए निबंधकार अपने विचारों की अभिव्यक्ति कर सकता है और समाप्ति वाक्य लिख सकता है।
निबन्ध की शैली?
निबंध लिखने के लिए दो बाते आवश्यक है - 1. भाव
2. भाषा
दोनों की अपनी विशेष महत्ता है। भाषा के उचित प्रयोग बिना भाव की अभिव्यक्ति नहीं हो सकती। भाव और भाषा को समन्वित करने के ढंग को शैली कहते हैं।
वो शैली जो पाठक को बिना किसी उलझन में डाले प्रभावित करें वहीं श्रेष्ठ शैली है । एक अच्छी शैली में भाषा कभी भाव प्रस्तुति के लिए भार नहीं होती, बल्कि एक मार्ग दर्शक का काम करती है।
भाषा की दृष्टि से निबंध की दो शैलियां हैं -:1. प्रसाद शैली 2. समास शैली।
1. अति साधारण तरीके से सहज सुगम भाषा में लिखी गई बात प्रसाद शैली है
2. किसी बात को कठिन शब्दों में कहना, साधारण भाषा के स्थान पर असामान्य भाषा का प्रयोग समास शैली है।

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